पीजी डीएवी कालेज (इवनिग) नई दिल्ली में “आत्मनिर्भर भारत के लिए गीता आधारित नीडोनॉमिक्स:” पर वेबिनारi

जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र  03 फरवरी, 2021: जेएनयू जयपुर के पूर्व कुलपति एवं कुरुक्षेत्र आधारित नीडोनोमिस्ट प्रो. एमएम गोयल ने कहा कि आज प्रदेश व देश में नीडोनॉमिक्स (आवश्यकता का अर्थशास्त्र) की जरूरत है। इसको हर किसी को अपनाना होगा। उन्होंने यह बात बुधवार को पीजी डीएवी कालेज (इवनिग) नई दिल्ली में आत्मनिर्भर भारत के लिए गीता आधारित नीडोनोमिस्ट पर बोलते हुए कही। प्राचार्य डा. आरके गुप्ता ने स्वागत कर उनकी उपलब्धियों का प्रशस्ति पत्र प्रस्तुत किया। कार्यक्रम संयोजिका डा. पलविदर कौर बख्शी ने मंच संचालन किया और उदिता ने सबका आभार जताया।

प्रो. गोयल के अनुसार उनका मानना है कि नीडोनॉमिक्स भारतीयों को आत्मनिर्भरता के लिए एक तरह का बीमा देता है। भारतीय जीवन बीमा निगम के चिह्न ही गीता योगक्षेमम वहाम्यहम (आपका कल्याण हमारी जिम्मेदारी है) पर आधारित है। आत्मनिर्भरता के लिए हमें पांच चरणों से युक्त रीच मॉडल की आवश्यकता है। इसमें गीता पढ़ना, ज्ञानवर्धन के साथ सशक्तिकरण, परोपकारी ²ष्टिकोण, प्रतिबद्धता और आवश्यकताएं हैं।

विपणन के एनएडब्ल्यू ²ष्टिकोण (आवश्यकता, साम‌र्थ्य एवं मूल्य) को अपनाकर अर्थव्यवस्था को उपभोक्ता के अनुकूल बनाया जा सकता है। उपभोक्ताओं, उत्पादकों, वितरकों और व्यापारियों के रूप में भारतीयों को स्ट्रीट स्मार्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक अर्थव्यवस्था में निर्वाह योग्य विकास और लोगों के लिए लालच पर नजर रखने के साथ आत्मनिर्भरता आवश्यक और पर्याप्त है। लोगों को वित्तीय योजना के साथ वैदिक ज्ञान में निवेश के रहस्यों को अपनाना है। जो आवश्यकताओं की अर्थशास्त्र को अपनाने से निर्भीकता और खुशी लाता है। आत्मनिर्भरता के लिए मौद्रिक नीति के तहत शून्य दर पर ऋण और राजकोषीय नीति के तहत शून्य अनुदान निर्यात अभिविन्यास के साथ विनिर्माण नीति के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक है।

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